• July to September 2026 Article ID: NSS9998 Impact Factor:8.05 Cite Score:107 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9998 View PDf

    महात्मा गाँधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा

      डॉ. महेश कुमार
        सहायक आचार्य, राजकीय कला महाविद्यालय, सीकर (राज.)

शोध सारांश-  महात्मा गाँधी के राजनीतिक चिंतन में ग्राम स्वराज की अवधारणा रही है, उनके मूल में उनका जो ध्येय था, वह वस्तुतः गाँवों को मात्र प्रशासनिक अधिकार देना या राजनीतिक सपने सौंपना नहीं रहा, वरन् गाँवों को आत्मनिर्भर, स्वावलम्बी बनाना, सामाजिक भेदभाव से मुक्त समाज की स्थापना करना तथा निचले स्तर से लोकतंत्र को विकसित व साकार करना था। ताकि सच्चे अर्थों में गाँवों का विकास हो सके और केवल गाँवों ही नहीं, अपितु समग्र भारत राष्ट्र राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक रूप से सशक्त व सुदृढ़ हो सके। इस हेतु कुछ मूलभूत आवश्यकताएँ, अधिकार व व्यवस्था ग्राम संदर्भ में भी वांछनीय थीं, जो गाँधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा को अभिव्यक्त करती हैं तथा जिनका साकार होना ग्राम-विकास, ग्राम स्वराज तथा राष्ट्र-विकास का द्योतक है। प्रस्तुत लेख में गाँधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा और इसे साकार करने हेतु किए गए कार्य-प्रयासों का गवेषणात्मक अध्ययन-विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

शब्द कुंजी- महात्मा गाँधी, ग्राम स्वराज, अवधारणा, ग्राम-विकास, प्रशासनिक अधिकार, लोकतंत्र, सत्ता विकेन्द्रीकरण, राजनीतिक, आत्मनिर्भर, नैतिकता, स्थानीय स्वशासन।