• July to September 2026 Article ID: NSS9999 Impact Factor:8.05 Cite Score:29 Download: 0 DOI: https://doi.org/10.63574/nss.9999 View PDf

    कुँअर बेचैन के गीतों में युगबोध एवं समसामायिक जीवन की अभिव्यक्ति

      प्रीति रामरतन नागौर
        शहीद भीमानायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी (म.प्र.)

शोध सारांश-  कुँअर बेचैन ने अपने गीतों में युग बोध एवं समसामायिक जीवन का सजीव चित्रण किया है। बेचैन जी हिन्दी गीत और नवगीत परम्परा के महत्वपूर्ण रचनाकार है। उनके गीतों में व्यक्तिगत अनुभूति के साथ-साथ अपने समय की सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक और सांस्कृतिक स्थितियों का प्रभाव दिखाई देता है। उनके प्रारंभिक गीत संग्रह ”पिन बहुत सारे”(1972) और ”भीतर साँकल- बाहर साँकल”(1978) से लेकर बाद की सभी रचनाओं तक में आधुनिक जीवन बोध निरंतर विकसित होता दिखाई देता है।