• October to December 2024 Article ID: NSS8893 Impact Factor:8.05 Cite Score:1482 Download: 53 DOI: https://doi.org/ View PDf

    क्रीड़ा चिकित्सा का महत्व : वर्तमान खेलों के संदर्भ में

      कु. भारती चंदेल
        क्रीड़ा अधिकारी, शासकीय आदर्श महाविद्यालय, हरदा (म.प्र.)
  • शोध सारांश-   ओलम्पिक खेल जो की ब्राजील के रियो डी जनेरियो में 5 से 21 अगस्त 2016 तक आयोजित किया गया था में यह नियम था कि यदि कोई खिलाड़ी प्रतियोगिता के समय खेल मैदान पर घायल हो जाता है तो खेल को रोक दिया जाता था और नियम यह था की पीडित खिलाड़ी को किसी तरह की औषधि लेनी की अनुमति नहीं थी । यदि खिलाड़ी कोई औषधि लेना चाहता है तो चिकित्सक की निगरानी में ही ले सकता था। यह नियम डोपिंग रोकने के लिए थे। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए श्क्रीडा चिकित्साश् एक कारगर उपचार पद्धति साबित हुई। चिकित्सा के क्षेत्र में क्रीड़ा चिकित्सा के उपयोग से एक नये युग की शुरूआत हुई है। यह पूरी दुनिया के सामने एक नये चिकित्सा उपकरण के रूप में आया है। चिकित्सकों के सामूहिक प्रयासो से चिकित्सा के क्षेत्र में उपचार का नया द्वार खुला है। वर्तमान समय में व्यायाम के क्रियाकलाप इतने प्रचलित हो गये हैं कि उनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि क्रीड़ा चिकित्सा का भविष्य बहुत उज्जवल है। इसे सूक्ष्म रूप से देखें तो पता चलता है कि यह चिकित्सा विज्ञान की एक शाखा है। जिसका संबंध खिलाड़ियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने शारीरिक प्रदर्शन को बढ़ाने तथा रोगों की रोकथाम से होता है। क्रीड़ा चिकित्सा सिद्धांतों का अध्ययन और अभ्यास है। साथ ही खेलों के विज्ञान से संबंधित है। विशेष रूप से खेल स्पर्धाओं के दौरान चोट और निदान उपचारए चोट के दौरान रोकथामए खेल प्रशिक्षण सहित एथेलेटिक प्रदर्शनए व्यायाम और खेल पोषणए खेल मनोविज्ञान के क्षेत्र में कारगर है। इसका उद्देश्य खेलो के दौरान खिलाड़ी को लगने वाली चोट के लिए सावधान करना है साथ ही चोट के दौरान खिलाड़ियों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियां और उपचार है।

    शब्द कुंजी- शरीर क्रिया विज्ञानए खेल चिकित्सा, क्रीडा चिकित्सा, पोषक तत्व, शरीर रचना, संतुलित आहार, खेल अभ्यास, शारीरिक ऊर्जाए स्नायुतंत्र, मस्तिष्क, शिक्षण प्रशिक्षण, खेल अभ्यास, जल उपचार किरणीय उपचार पराध्वनि तरंग उपचार चिकित्सीय कारक, मनोवैज्ञानिक चिकित्साए वार्मिंग, अनुकूलन, खेल कौशल, रगड, गुमचोट, विदारण, चीरा, मोच, खिचांव ।